Dr. Rahat Indori Best Books

"बुलाती है मगर जाने का नहीं ये दुनिया है इधर जाने का नहीं "

Dr. Rahat Indori, a natural shayar in the World Urdu Shayari. He was also a famous bollywood lyricist and prior to all these he also was a professor of Urdu and a painter. He started his career from a Mill worker in Indore. He was performed Mushaira in Kavi Sammelan for more than 40 years in not only in India but many foreign countries including USA, UK, Bahrain, UAE, Kuwait etc. His highest education includes PhD degree in Urdu.

He wrote many fantastic books of shayaris which everyone should read who is somehow attracted towards Shayari. His famous books include Rut, Do Kadar or Sahi, Mere Baad, Dhoop Bahut Hai, Chand Pagal Hai, Maujood Hai and Naraz. He wrote many famous lyrics including musics form Munna Bhai M.B.B.S., Murder, Hamesha and other Blockbusters.

"मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर मगर हद से गुज़र जाने का नहीं "

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Books By Rahat Indori

सिसकती रुत को महकता गुलाब कर दूँगा
मैं इस बहार में सब का हिसाब कर दूँगा

मैं इंतिज़ार में हूँ तू कोई सवाल तो कर
यक़ीन रख मैं तुझे ला-जवाब कर दूँगा

हज़ार पर्दों में ख़ुद को छुपा के बैठ मगर
तुझे कभी न कभी बे-नक़ाब कर दूँगा


Do Kadam Aur Shi..

कल तेरा ज़िक्र छिड़ गया घर में
और घर देर तक महकता रहा

सर झुका कर जो बात करता है
तुमसे वो आदमी बड़ा होगा
ये ज़िंदगी किसी गूंगे का ख़्वाब है बेटा
संभल के चलना के रस्ता ख़राब है बेटा

ख़ुश रहना आसान नहीं है दुनिया में
दुश्मन से भी हाथ मिलाना पड़ता है


Mere Baad…

मेरे अश्कों ने कई आँखों में जल-थल कर दिया
एक पागल ने बहुत लोगों को पागल कर दिया

अपनी पलकों पर सजा कर मेरे आँसू आप ने
रास्ते की धूल को आँखों का काजल कर दिया

मैं ने दिल दे कर उसे की थी वफ़ा की इब्तिदा
उस ने धोका दे के ये क़िस्सा मुकम्मल कर दिया


Dhoop Bahut Hai

धूप बहुत है मौसम जल-थल भेजो ना
बाबा मेरे नाम का बादल भेजो ना

मौलसिरी की शाख़ों पर भी दिये जलें
शाख़ों का केसरया आँचल भेजो ना

नन्ही मुन्नी सब चेहकारें कहाँ गईं
मोरों के पैरों की पायल भेजो ना


Chand Pagal Hai

रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है

एक दीवाना मुसाफ़िर है मिरी आँखों में
वक़्त-बे-वक़्त ठहर जाता है चल पड़ता है

अपनी ताबीर के चक्कर में मिरा जागता ख़्वाब
रोज़ सूरज की तरह घर से निकल पड़ता है


Maujood

मैं लाख कह दूं कि आकाश हूं ज़मीं हूं मैं
मगर उसे तो ख़बर है कि कुछ नहीं हूं मैं

अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझ को
वहां पे ढूंढ रहे हैं जहां नहीं हूं मैं
मायूस…
मैं आईनों से तो मायूस लौट आया था
मगर किसी ने बताया बहुत हसीं हूं मैं

वो ज़र्रे ज़र्रे में मौजूद है मगर मैं भी
कहीं कहीं हूं कहां हूं कहीं नहीं हूं मैं


Naraz

हर मुसाफ़िर है सहारे तेरे
कश्तियाँ तेरी किनारे तेरे

तेरे दामन को खबर दे कोई
टूटते रहते हैं तारे तेरे

धूप-दरिया में रवानी थी बहुत
बह गए चाँद-सितारे तेरे

तेरे दरवाज़े को जुम्बिश न हुई
मैंने सब नाम पुकारे तेरे

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